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जिसे भी प्रभु राम मिले वीर हनुमान जी की कृपा से मिले- स्वामी कमलानंद जी

Swami Kamalanand

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फाजिल्का, 8 फरवरी 2019 (पंकज सिडाना) – राजा सिनेमा रोड पर स्थित श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि जी महाराज जी ने आज दूसरे दिन श्री हनुमान जी की महिमा का बखान करते हुए कहा कि श्री हनुमान जी भगवान से मिलाने के मुख्य जरिया रहे हैं। हनुमान जी की शरण लेने से बेघर सुग्रीव को भगवान भी मिले और राज्य भी मिला। जिसको भी भगवान मिले हैं श्री हनुमान जी की कृपा से ही मिले हैं। सुग्रीव को मिले और विभीषण को मिले, प्रभु से बिछड़ी हुई सीता जी को मिले, इस कलियुग में भी गोस्वामी तुलसीदास जी को, सूरदास जी को भगवान मिले। भगवान चाहे किसी को भी मिले, मगर श्री हनुमान जी की कृपा से ही मिले हैं। हर किसी को भगवान से मिलाने का श्र्रेय श्री हनुमंत लाल जी को ही जाता है।

 

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यदि जीवन में संसारिक सुख के साथ-साथ ईश्वर कृपा प्राप्त करनी है तो हनुमान जी की शरण ग्रहण करनी आवश्यक है। स्वामी कमलानंद जी ने कहा कि भगवान श्री राम को मां कौशल्या स्वयं अपने हाथों से भोजन बनाकर खिलाया करती थी। जो मां अपने बच्चों की सेवा अपने हाथों से करती है वह सभी बच्चे संस्कारी होते हैं। इसलिए माताओं को अपने बच्चों का पालन-पोषण स्वयं करना चाहिए। बच्चों को स्वयं हाथों से भोजन बनाकर खिलाना चाहिए, तभी वह संस्कारी बनेंगे। भोजन पर दृष्टि का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आज पाश्चात्य संस्कृति का कुप्रभाव अपने ऊपर आ चुका है। केवल शारीरिक सौंदर्य को बचाने के नाम पर माताएं अपने बच्चों को दूध नहीं पिलाते। यह अपने बच्चों के पर अत्याचार है। मां के सम्मान की रक्षा तो वही कर पाएगा जिसने अपनी मां का दूध पिया होगा, बोतल के दूध से महाराणा प्रताप या छत्रपति शिवाजी जैसे महापुरुष पैदा नहीं होंगे। जानकारी देते हुए मंदिर कमेटी के महामंत्री नरेश जुनेजा ने बताया कि इस आयोजन को संचालन करने में सभी सदस्य सहयोग कर रहे हैं। आज कथा के दौरान प्रधान महावीर प्रसाद मोदी, सुभाष बांसल, नरेश बांसल, रेशम लाल असीजा, अशोक डोडा, सुभाष, सुष्मा रानी धवन, कृष्णा सैन, बिमला शर्मा, विजय गिरधर, नीलमवर्मा, बिमला मक्कड़, संतोष शर्मा, कृष्णा कश्यप, खरैती लाल छाबड़ा, नंद लाल सिंगला, नरेश अरोड़ा, चरनपाल, प्रो. राम चंद्र बत्रा सहित बड़ी तादात में श्रद्धालुओं ने महाराज जी को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।

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