विवेकानन्द शिला स्मारक – एक भारत विजयी भारत

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गुरुग्राम, 14 नवंबर 2019 – कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक के 50 वें वर्ष की पूर्व संध्या पर, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी ने 2 सितम्बर 2019 से पूरे देश में ‘विवेकानन्द शिला स्मारक – एक भारत विजयी भारत’ के नाम से एक बड़ा संपर्क कार्यक्रम शुरू किया है।

स्वामी विवेकानंद ने 25, 26 और 27 दिसंबर 1892 को कन्याकुमारी तट के मध्य समुद्र की चट्टान पर ध्यान किया था। भारतभूमि के उस आखिरी चट्टान पर बैठकर उन्होंने अपने जीवन के लक्ष्य की खोज की और भारत के खोये हुए गौरव को पुनः बहाल करने के लिए अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी के दौरान इस शिला पर उनके लिए एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया, जिसका राष्ट्र के इतिहास में बहुत महत्व है। अनगिनत कठिनाइयों को पार करते हुए असंभव को संभव करने का, एकता का और उद्द्येश्यपूर्ण जीवन जीने का सन्देश देने वाला यह शिला स्मारक अपने 50 वे वर्ष में प्रवेश कर रहा है | अपनी अनूठी कहानी के माध्यम से, यह स्मारक समाज को प्रांत, भाषा, राजनीति और जातिगत भेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र हित में कार्य करने के लिए आह्वान करता है |

विवेकानन्द शिला स्मारक अपने आप में एक अद्वितीय– एक विशेष स्मारक है, जो समूचे भारतभर के लोगों की इच्छा से, उनके योगदान से निर्मित है |

विवेकानन्द शिला स्मारक ये एकमेव ऐसा स्मारक है, जिसके लिए दिसंबर १९६३ में दिल्ली में उपस्थित सभी 323 सांसदों ने राजकीय पक्षभाव से ऊपर उठाकर हस्ताक्षर किये थे |

इसकी दूसरी विशिष्ठता है की स्वामी विवेकानन्द के स्मारक निर्माण के लिए उस समय के 1% वयस्क आबादी ने (करीब 30 लाख लोगों) कुल 85 लाख रुपये देकर योगदान किया |

स्वामी विवेकानंद के लिए इस समुद्र के बीचों बीच बने भव्य शिला स्मारक की तीसरी विशिष्टता यह है कि इसके निर्माण की अवधि (1964-70) के बीच, लगभग सभी राज्य सरकारों, सत्ता में पार्टी के बावजूद, कम से कम 1 लाख रुपये का योगदान दिया। केंद्र सरकार ने भी स्मारक के लिए 15 लाख रुपयों का सहयोग किया। इस प्रकार, विवेकानंद शिला स्मारक सही मायने में भारत के महान देशभक्त संत स्वामी विवेकानंद के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक है।

इस स्मारक की चौथी विशिष्टता यह है कि यह अजंता, एलोरा, पल्लव, चोल, बेलूर मठ और कई तरह के बेजोड़ और असाधारण स्थापत्य और मूर्तिकला का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण है।

यह एकमात्र स्मारक है जिसके निर्माण बाद विवेकानंद केंद्र के रूप में 1972 में एक आध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन ने आकार लिया। स्वामी विवेकानंद के शब्दों में– ऐसे युवक युवती जो पवित्रता के तेज से पूर्ण, इश्वर के प्रति श्रद्धा लेकर तथा मृगेंद्र के सामर्थ्य से युक्त दीन दलितों के प्रति अपार करुणा लिए हुए राष्ट्र की सेवा में जीवनव्रती के रूप में अपना जीवन समर्पित करते हैं, वह संगठन का कैडर (cadre) है | उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है और देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। वहां वे उन व्यक्तियों को संगठित करते हैं जो समाज के लिए काम करना चाहते हैं और उनके माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का संचालन करते हैं।

आज इस प्रकार, विवेकानंद केंद्र की देश में 1005 जगहों पर सेवा गतिविधियाँ हैं। विवेकानद केंद्र योग, शिक्षा, ग्रामीण विकास, युवा प्रेरणा, बच्चों कको मूल्यशिक्षा, प्राकृतिक संसाधन विकास, ग्रामीण और जनजति क्षेत्रों में सांस्कृतिक अनुसंधान, प्रकाशन आदि के क्षेत्र में काम करता है। भारत सरकार द्वारा विवेकानंद केंद्र के काम को वर्ष 2015 के लिए गांधी शांति पुरस्कार से सन्मानित किया गया है।

इस शिला स्मारक के निर्माण में भारत के जनासामान्यों की भागीदारी इतनी व्यापक थी कि भारत के लोग एक हो गए और इस तरह स्मारक को सफलतापूर्वक बनाया जा सका। जब स्मारक पूरा हुआ तो 2 सितंबर 1970 से दो महीने के लिए उद्घाटन कार्यक्रम चला जिसमें प्रत्येक राज्य के लिए विशिष्ट तिथियों को निर्धारित किया गया था।

लोगों के साथ व्यापक संपर्कों के कारण यह भव्य स्मारक अस्तित्व में आ सका है, इसलिए यह निर्णय लिया गया कि अपने 50 वें वर्ष में “विवेकानन्द शिला स्मारक – एक भारत विजयी भारत” के नाम से एक राष्ट्रव्यापी संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया जाए। इस संपर्क कार्यक्रम का प्रारम्भ में विवेकानन्द केन्द्र की आखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्यों ने 2 सितंबर 2019 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति को प्रथम संपर्क किया | उसके बाद विवेकानंद केंद्र की अखिल भारतीय टीम ने उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात की।

विवेकानंद केंद्र की सभी राज्य टीमें सभी राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों से संपर्क करेंगी और विवेकानंद शिला स्मारक की प्रेरणादायक कहानी और विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों समाज के सभी वर्गों के लोगों तक पहुंचाएगी |

हरियाणा में विवेकानंद केंद्र ने स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती मनाते हुए वर्ष 2012 में अपना काम शुरू किया। विवेकानन्द केन्द्र ने विद्यालयों, महाविद्यालाओं और विश्वविद्यालयों के माध्यम से विविध कार्यक्रमों की शुरुआत की | योग, संस्कार और स्वाध्याय के माध्यम से सभी समाज मूहों को जोड़ने का प्रयास करते हुए विवेकानन्द केन्द्र समाज के कोने-कोने तक पहुंच रहा है।

हरियाणा में हमारी कुछ शाखाओं ने पहले ही संपर्क कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं, इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से गुरुग्राम शाखा भी अपना व्यापक संपर्क कार्यक्रम शुरू करने जा रही है।

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