साउथ सिटी-टू में परोपकार माह के उपलक्ष्य में साध संगत ने नाम चर्चा में गाया गुरुयश

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गुरुग्राम, 2 सितम्बर 2019। गुरु द्रोणाचार्य की नगरी गुरुग्राम में डेरा सच्चा सौदा के गद्दीनशीन हजूर महाराज संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी के गद्दी दिवस के रूप में मनाये जाने वाले परोपकार माह की शुरुआत रविवार से हुई। इस कड़ी में यहां साउथ सिटी-टू में नाम चर्चा घर के पास भव्य टेंट लगाकर बेहतरीन सजावट की गई थी। रंग-बिरंगे गुब्बारों, लडिय़ों से पूरे पंडाल को सजाया गया है। नाचती गाती संगत नाम चर्चा कार्यक्रम में पहुंच रही है।

गुरुग्राम के अति पॉश इलाके में नाम चर्चा घर होने की वजह से यहां आस-पास रहने वाले लोगों के लिए यह कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बना रहा। लोग अपने घरों की छत से, फ्लैट की बालकनी से, आते-जाते गाडिय़ों से नाचती गाती की संगत देखकर खुद भी रोमांचित हो रहे थे। पंडाल में साध संगत सज-धज कर बैठी रही। टूटे-फूटे सूर ताल से भजनों के गायन की शुरुआत करने वाले प्रेमी अब मंझे हुए कलाकारों की तरह यहां पर गुरुजी का गुणगान कर रहे हैं। ग्रंथों में दर्ज भजनों को बेहद ही वैराग्य के साथ यहां गाया जा रहा था। साध संगत भी भजनों का रसपान कर रही है।

दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग यहां गाड़ियों में भरकर पहुंच रहे हैं। बेशक नाम चर्चा का कार्यक्रम दस बजे से बारह तक का रखा गया था, लेकिन बाहर से आने वाली संगत बारह बजे के बाद तक भी यहां पहुंच रही थी। इस कार्यक्रम में सेवादार भी अपनी ड्यूटी पर पूरी तरह से मुस्तैद रहे। चाहे ट्रैफिक समिति हो, पानी समिति हो, चाय समिति हो, सच्ची शिक्षा समिति हो, ओबीडी सर्विस समिति हो या फिर एमएसजी के प्रोडक्ट की बिक्री के लिए जिम्मेदार भाई बहन, सभी अपनी ड्यूटी को कर्तव्य के साथ निभा रहे थे। नाम चर्चा घर के दोनों और मुख्य सड़क पर काफी दूर तक यातायात को नियंत्रित करने के लिए समिति के सेवादार खड़े रहे। वे दूर से ही वाहनों को क्षेत्र में सीमा चलने के लिए निर्देश देते रहे, ताकि जाम की स्थिति न बने।

पंडाल में गुरुजी के गाये गये भजनों को जब चलाया गया तो पूरी साध-संगत झूम उठी। चूंकि मर्यादा में रहकर सभी को खुशियां मनाने का हुकम है, इसलिए संगत ने बैठे-बैठे ही गुब्बारे हिलाकर खुशियां मनाई। चाहे बच्चे हों, महिलायें हों या पुरुष, सभी इस खुशी के माहौल में झूम रहे थे। जिम्मेदारों ने सारी साध-संगत को गुरूजी के जन्मदिन की बधाई देते हुये उनकी ओर से शुरू किये गये मानवता भलाई के कार्यों को निंरतर करते रहने को प्रेरित किया। इसके बाद सभी को बूंदी का प्रसाद और लंगर-भोजन वितरित किया गया।

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