तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनारः एसजीटी विश्वविद्यालय की पहल

226

SGT Webinar

गुरुग्राम, 9 मई 2020 एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम और नेशनल कौंसिल ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एजुकेशन के सौजन्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार (वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस) का आज उद्घाटन हुआ। वेबिनार का विषय है- वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन क्रिएटिंग स्पोर्ट्स कल्चर इन यूनिवर्सिटिज। इस अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में 16 से भी अधिक देशों के खेल गतिविधियों से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। तीनों तीन विश्वविद्यालयों में खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन और इनसे जुड़े मुद्दों और समस्याओं पर 30 से भी अधिक खेल विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त करेंगे। वेबिनार 11 मई तक चलेगा।

आज के अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में खेल गतिविधियों से जुड़े 5 विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वेबिनार कई सत्रों में विभाजित था। पहले सत्र की अध्यक्ष यूनिवर्सिटी पुतरा मलेशिया की प्रो. (डॉ.) शामला सुब्रमणियम थीं तथा मुख्य वक्ता थे- यूनिवर्सिटी सैंस मलेशिया के प्रो. अलेक्जेंडर क्रासिलस्कीकोव। इस सत्र में ‘विश्वविद्यालयों में खेलकूदः चुनौतियाँ और संभावनाएँ’ विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. अलेक्जेंडर क्रासिलस्कीकोव ने कहा कि विश्वविद्यालयों में खेलों के महत्त्व को समझते हुए यूनेस्को ने 20 सितम्बर को इंटरनेशनल डे ऑफ यूनिवसिटी स्पोर्ट्स घोषित किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर के अंतरराष्ट्रीय खेल फेडरेशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर के तमाम खेल फेडरेशन खेलों को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस क्रम में प्रो. अलेक्जेंडर ने इंटरनेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन तथा वर्ल्ड यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के बारे में बताया कि किस तरह ये दोनों फेडरेशन विश्व स्तर पर अच्छा कार्य कर रहे हैं।

 

SGT University

उन्होंने क्लास के पहले और उसके बाद भी छात्रों को खेलों से जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने खेलों में भारतीय खेल संस्थानों की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत में स्कूल स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर खेलों को प्रोत्साहन दिया जाता है। अपने वक्तव्य के अंत में प्रो. अलेक्जेंडर ने एसजीटी विश्वविद्यालय का भी उल्लेख किया और कहा कि यह विश्वविद्यालय अपने कई संकायों के साथ तालमेल करके छात्र-छात्राओं के बीच खेल का बेहतर और प्रतियोगी माहौल बना सकता है।

 

SGT University

इससे पहले वेबिनार का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन भाषण में अपने विचार व्यक्त करते हुए एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. जी. एल. खन्ना ने कहा कि खेल गतिविधियों से जीवन का बहुमूल्य पाठ सीखने को मिलता है, इसके साथ ही सहयोग की भावना, व्यवहार कुशलता, शारीरिक और मानसिक विकास भी खेलों की वजह से होता है। उन्होंने कहा कि अब यह धारणा समाप्त करने की जरूरत है कि खेलों से समय बर्बाद होता है। डॉ. खन्ना ने वेबिनार के आयोजन के लिए दशमेश एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री मनमोहन सिंह चावला और एसजीटी विश्वविद्यालय के सी. ई. ओ. डॉ. रिजवान मुसन्ना के प्रति आभार व्यक्त किया। इस वेबिनार को आयोजित करने की संकल्पना श्री मनमोहन सिंह चावला की थी जिसे डॉ. जी. एल. खन्ना तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के सदस्यों ने कार्यरूप दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सी. ई. ओ. डॉ. रिजवान मुसन्ना ने कहा कि खेल के विकास का सीधा संबंध देश के विकास से है।

उद्घाटन के बाद एक्सपर्ट्स टॉक के अंतर्गत अपने विचार व्यक्त करते हुए पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगबीर सिंह चीमा ने कहा कि खेल संस्कृति का अर्थ है कि शिक्षा संस्थानों को खेल गतिविधियों से जोड़ा जाए। उन्होंने फिजिकल ट्रेनिंग को अनिवार्य विषय बनाने पर बल दिया। डॉ. चीमा ने कहा कि खेल गतिविधियों को छात्र-छात्राओं को अपने व्यवहार में शामिल करना चाहिए।

एक्सपर्ट्स टॉक के अंतर्गत स्पोर्ट्स एआईयू के पूर्व सचिव डॉ. गुरदीप सिंह ने कहा कि खेलों पर ध्यान देने पर शरीर, मन और कार्य करने की क्षमता तीनों का विकास होता है। भारत में खोलों के विकास के लिए डॉ. सिंह ने पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को हम खेलों में व्यस्त नहीं रखेंगे तो युवा ड्रग जैसी गतिविधियों में शामिल होकर हमें व्यस्त रखेंगे। उन्होंने खेलों में मीडिया की भूमिका की भी चर्चा की।

यूनिवर्सिटी पुतरा मलेशिया की प्रो. (डॉ.) शामला सुब्रमणियम ने मलेशिया में खेलों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मलेशिया में एजुकेशनल स्पोर्ट्स सेंटर खेलों को बढ़ावा देने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

वेबिनार का दूसरा सत्र ‘खेलों के माध्यम से स्वस्थ समाज का निर्माण’ पर आधारित था। इस सत्र के मुख्य वक्ता थे खेल विज्ञान विशेषज्ञ और आबूधाबी स्पोर्ट्स कौंसिल, यू. ए. ई. के प्रो. खालिद खलीफा डोगमैन और सत्र की अध्यक्षता की पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के विभागाध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने।

दूसरे सत्र का आरंभ करते हुए प्रो. खालिद खलीफा डोगमैन ने कहा कि खेलों पर कई चीजों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि तापमान, पर्यावरण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, संस्कृति और एक जगह से दूसरी जगह पर आने-जाने की भावना का खेलों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। प्रो. खालिद ने कहा कि तापमान और पर्यावरण को बदला नहीं जा सकता लेकिन जन जागरूकता के माध्यम से इन पर काबू जरूर पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तापमान अधिक होने के बावजूद जनजागरूकता के माध्यम से आबूधाबी में खेलों का अच्छा माहौल है और इसे वर्ल्ड कैपिटल ऑफ स्पोर्ट्स घोषित किया गया है। प्रो. खालिद ने कहा कि लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर खेलों से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।