भारत में विचारों को प्रकट करने की है स्वतंत्रता : स्वामी ज्ञानानंद

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Swami Gyananand

 

गुरुग्राम, 17 नवंबर 2019। भारत में विचारों को, भावों को प्रकट करने की स्वतंत्रता है। इसलिए किसी भी विषय पर हम खुलकर बोलते हैं और उस पर अपनी भावनायें प्रकट करते हैं। जबकि बहुत से देशों में नागरिकों को अपने विचार प्रकट करने की आजादी नहीं है। यह बात गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने यहां न्यू कालोनी के दशहरा मैदान में दिव्य गीता सत्संग के तीसरे दिन प्रवचनों का श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुये कही।

स्वामी जी ने गीता को जीवन का सार, व्यवहार, आचार-विचार का द्योतक बताते हुये कहा कि गीता को पूरे विश्व के दार्शनिक, विद्वान, चिंतक और विचारक स्वीकार करने पर मजबूर हुये हैं। क्योंकि गीता लोजिकल है और इसमें व्यवहारिक दर्शन है। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक का उदाहरण देकर कहा कि जेल में जब वे पहुंचे तो उनसे उनकी इच्छा पूछी गई। अपनी इच्छा में तिलक ने गीता के साथ कागज और कमल की मांग की। उन्हें जब यह सब दिया गया तो गीता का बारीकी से अध्यन करके जेल में ही उन्होंने चिंतन करते हुये गीता की व्याख्या की। इसे उन्होंने कर्मयोग नाम दिया। भावगत गीता का कर्मयोग अपने आप में रहस्य है। गीता की हर बात व्यवहारिक धरातल की सच्चाई है। गीता सब प्रकार के ज्ञान का स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होता है। यह गीता में भी माना गया है।

उन्होंने कहा कि यह बड़ी कठिनाई है कि आज के समय में अगर कोई उदाहरण देता है तो उसे अपना नाम देने की चेष्टा करता है। जबकि गीता के संदेश में श्रीकृष्ण ने जब भी अर्जुन को कोई उपदेश दिया तो उस बात को यह कहकर प्रसारित किया कि यह पूर्व में ऋषि-मुनि भी यह उपदेश दे चुके हैं। यानी उन्होंने कभी भी किसी बात पर खुद का दावा नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि अपने भाव को कभी नहीं छोडऩा चाहिये। हमारी आस्था भगवान में है। इसका वैज्ञानिक आधार भी है। वस्तु का परमात्मा की मानकर उपयोग करेंगे तो हम दुखी नहीं होंगे। गीता में कर्मयोग को लेकर बहुत ही मधुर सूत्र हैं।

गुरुदेव जी भी कहते हैं कि गीता के शब्दों में बहुत रस है। एक-एक शब्द सूत्र है। कर्म, व्यवहार, संसार, व्यवहार का त्याग गीता में कहीं नहीं है। गीता का त्याग उसे है, जो जीवन में आरोपित है। वांछित है। उसका त्याग करने को गीता में कहा गया है। उन्होंने ईश्वर का उदाहरण देकर कहा कि आज स्मॉग, वायु प्रदूषण छाया पड़ा है। हर कोई आतंकित है। सभी ईश्वर की ओर देख रहे हैं कि वर्षा हो, तेज हवा चलें। कोई वैज्ञानिक, नेता या फिर चिकित्सक कुछ नहीं कर पा रहा। अगर कोई कर सकता है तो वह ईश्वर ही है। उन्होंने आगे कहा कि इंसान सुख पाने को कितना कुछ करता है। अगर शांति से बैठकर बिना कुछ शारीरिक मेहनत किये बस मन से प्रभु को पा ले, उससे अधिक शांति कहीं नहीं हो सकती। सुख पाने के लिए इंसान सब कुछ कर लेगा, पर चैन से नहीं बैठेगा। अगर ध्यान लगाकर बैठ जाये तो बिना कुछ और किये शांति मिल सकती है।

 

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स्वामी ज्ञानानंद ने सात समुंद्र पार पहुंचाई गीता : धर्मदेव

इस मौके पर बोलते हुये महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद ने गीता का संदेश सात समुंद्र पार तक पहुंचाया है। वे गीता को समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत संत और ग्रंथ का देश है। ऐसा इसलिए कि श्रीमद् भागवत ग्रंथ है और इसके प्रणेता श्रीकृष्ण संत हैं। भारत में नारियों की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि गुरू द्रोण की नगरी धन्य है, जहां पर स्वामी ज्ञानानंद ने गीता का प्रचार-प्रसार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनसे गीता का ज्ञान पा लिया, उसका यमराज भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। गीता संसार में बसने के लिए है, फंसने के लिए नहीं। इसलिए जीवन में अच्छे कर्म करके जियें। अयोध्या के फैसले पर पीएम नरेंद्र मोदी, न्यायधीशों को बधाई देते हुये स्वामी जी ने कहा कि 2022 तक सभी को आवास देने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भगवान श्रीराम को भी छत मिल गई। यह गर्व की बात है।

सत्संग के तीसरे दिन स्वामी धर्मदेव के साथ मेयर मधु आजाद, हुडा प्रशासक चंद्रशेखर खरे, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मार्कण्डेय आहुजा, आरके सिंह ने दीप प्रज्जवलन किया। वहीं पूर्व मंत्री धर्मबीर गाबा, बीजेपी जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बतरा, पार्षद मधु बतरा, पूनम माता जी, पार्षद सीमा पाहुजा, पार्षद अश्वनी शर्मा, एचएस चावला ने गीता पूजन किया। इस दौरान पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत, पूर्व चेयरमैन भानीराम मंगला, महेंद्र मेहंतीरत्ता, सतपाल यादव, वाईएम मेहरा, अशोक आहुजा, नानक, मुलखराज, श्याम सुंदर, देवेंद्र बतरा, भारत भूषण बंसल, ममता सूटा, धर्मेंद्र बजाज, रमेश कामरा आदि मौजूद रहे।

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शिविर में 400 लोगों ने उठाया स्वास्थ्य लाभ

श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से यहां न्यू कालोनी में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सानिध्य में निशुल्क सामान्य स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया।

इस शिविर के शुभारंभ मौके पर महाराज जी ने कहा कि मानव के सेवा करना बहुत ही बड़ा काम है। कोई इंसान बिना इलाज के, बिना खून के अगर जीवन खो देता है तो यह हमारे समाज पर कलंक है। इसलिए समाज के हर उस व्यक्ति को जो शारीरिक रूप से तंदुरुस्त है, उसे ऐसी समाजसेवा करनी चाहिये। इस मौके पर चिकित्सकों की टीम ने करीब 400 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करके उन्हें निशुल्क दवाइयां वितरित की। इस मौके पर हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन डा. सुभाष खन्ना, नेत्र विशेषज्ञ डा. त्रिलोक आहुजा, सामान्य चिकित्सक डा. कर्नल केके सोनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सरोज यादव, दंत चिकित्सक डा. नेहा नासा, होम्योपैथी डा. अन्नू तथा फिजियोथैरेपिस्ट के रूप में डा. पूजा ग्रोवर ने अपनी सेवायें दी। निरामया चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आखों के निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा भी मुहैरा कराई गई।