डेथ वैली झील में तैराकी व केएमपी पर साइकिलिंग का अभ्यास कर सुरेंद्र बने आयरनमैन

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गुरुग्राम, 8 सितम्बर, 2019। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं -जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता-हौंसलों से उड़ान होती है। परिन्दों को मिलेगी मंजिल एक दिन-यह उनके खुुले पर बोलते हैं, वही लोग अक्सर रहते हैं खामोश-दुनिया में जिनके हुनर बोलते हैं। हौंसलों के साथ बुलंदियां छूने को ये लाइन उस शख्स पर सटीक बैठती हैं, जिसने सुविधाओं के अभाव में भी अपने हौंसलों के साथ मंजिल को हासिल किया और आयरनमैन बनकर स्वदेश लौटा।

हम बात कर रहे हैं आयरनमैन बने 49 साल के सुरेंद्र यादव की। सुरेंद्र यादव सिर्फ एक नाम भर नहीं है, बल्कि उस नाम के आगे अब टाइटल जुड़ गया है आयरनमैन। आपको बता दें कि आयरनमैन टाइटल ऐसे मजबूत लोगों को मिलता है, जो डब्ल्यूटीसी द्वारा दुनियाभर में आयोजित की जाने वाली ट्रायथलॉन में खुद को बेहतर साबित करते हैं। गुरुग्राम के सुरेंद्र यादव ने ऐसा कर दिखाया। सुरेंद्र यादव ने 3.86 किलोमीटर की समुद्र में तैराकी, 180.25 किलोमीटर की साइकिलिंग और 42.2 किलोमीटर की दौड़ 16 घंटे के भीतर पूरी की।

इस उपलब्धि से पूर्व खुद को तैयार करने के पीछे सुरेंद्र यादव की जो मेहनत है, वह इतनी आसान नहीं थी। ना तो यहां अभ्यास के लिए कोई बेहतर सुविधा है और न ही साइकिलिंग के लिए कोई ट्रैक। फिर भी सुरेंद्र ने हौंसलों के साथ अपने कदम आगे बढ़ाये। तैराकी के लिए उन्होंने फरीदाबाद के सूरजकुंड स्थित डेथ वैली झील को चुना और साइकिलिंग के लिए केएमपी एक्सप्रेस-वे को चुना। इन दोनों जगहों पर कड़ी मेहनत करके सुरेंद्र यादव ने खुद को इस प्रतियोगिता के लिए तैयार किया, जो उसे आयरन मैन का खिताब दिला सकती थी। सुरेंद्र ने बताया कि केएमपी एक्सप्रेस-वे जहां फर्राटे के साथ वाहन आते-जाते हैं, वहां साइकिलिंग करना कोई आसान काम नहीं था। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने जुनून को जिंदा रखते हुये अभ्यास जारी रखा।

इस स्पर्धा में गुरूग्राम से भाग लेने गये राजीव गुप्ता ने कहा कि उन्होंने भी आयरनमैन का खिताब पाने को खूब दम लगाया, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके। राजीव गुप्ता ने सुरेंद्र यादव की सफलता के क्षण यहां सांझा करते हुये कहा कि उन्होंने प्रतियोगिता में खूब मेहनत की, पसीना बहाया और आयरनमेन का खिताब लेकर ही दम लिया। यह प्रतियोगिता अमेरिकन मिलिटरी की ओर से आरंभ की गई थी। इसमें स्वीमिंग, दौड और साइकिलिंग को जोडकर टफ बनाया गया।

17 अगस्त 2019 को हुई थी प्रतियोगिता

सुरेंद्र ने 17 अगस्त 2019 को दुनियाभर के 2500 प्रतिभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा की। उन्होंने मुष्किल कार्य के बारे में अपने अनुभव सांझा करते हुये कहा कि अगस्त 2018 में वह इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने से वंचित रह गये थे। एक दुर्घटना में उनके बायें कंधे पर चोटें आई। लेकिन इस खिताब को पाने को वे बेताब थे और इस साल उन्होंने पूरी तैयारी की। उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रतिभागी 30 से 35 वर्ष आयुवर्ग के 75 किलोग्राम के औसत वजन वाले थे। 49 वर्षीय सुरेंद्र यादव का प्रतियोगिता से पहले उनका वजन करीब 90 किलो था। तीन सप्ताह के भीतर उन्होंने अपना वजन कम किया और खुद को इस प्रतिस्पर्धा के लायक बनाया। इस प्रतियोगिता में सुरेंद्र यादव ने बाल्टिक सागर में 3.86 किलोमीटर तैराकी करने के बाद 180.25 किलोमीटर साइकिल रेस में हिस्सा लिया। स्वीडन में 42.2 किलोमीटर दौड करने के बाद 16 घंटे की निर्धारित सीमा के भीतर आयरनमैन का खिताब हासिल किया।

भारत में खेल गतिविधियों के लिए सुविधाओं का अभाव

सुरेंद्र यादव ने बातचीत में कहा कि बेशक हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। तकनीकी का दौर चल रहा है। फिर भी देश में खेल और अन्य प्रकार की साहसिक गतिविधियों के लिए कोई उचित सुविधा नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि भारत में प्रतिभायें बहुत हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने में विफल रहते हैं। क्योंकि जिस प्रतियोगिता में भाग लेकर वे आये हैं, उसमें 2300 प्रतिभागियों में से मात्र 11 ही भारतीय प्रतिभागी थे।

प्रेस वार्ता में जीआईए के खजांची विनोद गुप्ता, राजेष गोयल, रामकिषन, मानव आवाज संस्था के संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट अभय जैन समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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