एसजीटी विश्ववि़द्यालय ने रीडिफाईनिंग एजूकेशन विषय पर सार्वजनिक व्याख्यान का किया आयोजन

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नई दिल्ली, 28 मार्च 2019 – एसजीटी विश्ववि़द्यालय ने बुधवार को रीडिफाईनिंग एजूकेशन विषय पर एक सार्वजनिक व्याख्यान का आयोजन नेहरू मेमोरियल म्यूजियम तीन मूर्ति भवन में किया। इसमें मुख्य वक्ता पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी और दिल्ली विश्वि़वद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह थें।

इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखते हुए पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत की पहचान बनाने मे शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिये शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन की विशेष आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनानी होगी जो हमारी प्राचीन विरासत पर आधारित हो और भविष्य के लिये उपयोगी हो।

 

 

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प्रो. दिनेश सिंह ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने जाने-माने गणितज्ञ रामानुजम का उदाहरण देते हुए बताया कि रामानुजम चाहे कितने भी योग्य क्यों ना हों लेकिन मौजूदा व्यवस्था में उन्हें पीएचडी की डिग्री नही मिलती। प्रो सिंह ने कहा कि आज की शिक्षा वास्तविक धरातल से कोसों दूर है। उन्होने भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां तक्षशिला नालंदा विक्रमशिला जैसे विश्ववि़द्यालय थे जिनकी ख्याति दुनिया भर में थी तथा भारत की पहचान शिक्षा के केंद्र के रूप में रही है। उन्न्होने ज्ञान को स्किल से जोडने पर बल दिया और कहा कि ये दोने एक ही सिक्के के दो पहलू है।

 

 

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कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन एसजीटी विश्ववि़द्य़ालय के पीवीसी प्रो गुरप्रीत टुटेजा ने दिया। इस अवसर पर दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल श्री नजीब जंग दशमेश एजूकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री मनमोहन सिंह चावला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सचिव श्री सचिदानंद जोशी समेत देश के कई शिक्षाविद व विद्यार्थी मौजूद थे।