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2.77 एकड़ विवादित भूमि पर बनेगा राम मंदिर, मस्जिद के लिए अलग दी जाएगी 5 एकड़

ram mandir

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सीजेआई रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने फैसले में कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। साथ ही उन्‍होंने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अयोध्‍या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने का फैसला दिया। इस पर सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने असंतुष्टि जताई। उन्‍होंने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं, लेकिन हम इससे संतुष्‍ट नहीं है। इसे लेकर हम आगे की कार्रवाई के संबंध में विचार करेंगे।’

5 न्यायाधीशों की बेंच ने 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल रहे। पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने, अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान- के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर 6 अगस्त से सुनवाई शुरू की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाए। 2.77 एकड़ ज़मीन हिन्दुओं के पक्ष में रहेगी। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाएगी। ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा का प्रतिनिधि भी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान को मालिकाना हक दिया।