कशमकश में राजनैतिक दल, किसको टिकट दें और किसकी टिकट काटें

373

bjp final

 

गुरुग्राम, 24 सितम्बर 2019 – हरियाणा में विधानसभा चुनावों की घोषणा होते ही कांग्रेस और भाजपा में मीटिंगों का दौर लगातार जारी है। लेकिन बात अगर हरियाणा की सबसे हॉट सीट गुरुग्राम की करें। तो यहां के उम्मीदवार की घोषणा करना दोनों पार्टियों के लिए ऊंट को सीढ़ी पर चढ़ाने से कम नही है। क्योंकि दोनों दलों को टिकट की घोषणा के बाद होने वाली बगावत को लेकर कोई भी दल जोखिम नही उठाना चाहता।

सत्तादल भाजपा की बात करे तो यहां 4 नेता दावेदारों की मुख्य लिस्ट में माने जा रहे हैं। सबसे पहला नाम विधायक उमेश अग्रवाल, जो की 2014 के चुनावों में हरियाणा में सबसे ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी। ऐसे में विधायक को टिकट देना पार्टी की मजबूरी रहेगी। क्योंकि कोई भी पार्टी विरोधी कारण विपक्षियों को नही मिल पा रहा। दूसरा नाम हरियाणा डेयरी विकास प्रसंग चेयरमैन जीएल शर्मा, जो पिछले काफी समय से सीएम से नजदीकियां बनाए हुए हैं। खुले तौर पर टिकट के लिए मजबूत दावेदारी का हर सम्भव प्रयास कर रहे है। विभिन्न चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय काम भी किया। अब बात करे कुछ दिनों से सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे नाम स्वामी धर्मदेव की। पंजाबी वोट बैंक को साधने की कोशिश के चलते इनका नाम चर्चाओं में हैं। लेकिन चर्चा ये भी है कि इनका ऐसा एक प्रयास पहले भी विफ़ल रह चुका है। लेकिन मुख्यमंत्री को अपना वोटबैंक दिखाने के लिए कुछ दिन पहले स्वामी धर्मदेव पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बत्रा को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कमल थमा चुके है। अब नाम है बहुत ही कम समय मे अपना नाम चर्चाओं में लाने वाले जिलासचिव नवीन गोयल का। जो कि अपने प्रचार अभियान के आरम्भ से ही लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों को आगे बढ़ाकर पार्टी का सच्चा सिपाही होने का सबूत पेश करने की कोशिश में है। ऐसे में पार्टी की कोर कमेटी सोचने पर विवश है कि किसे पार्टी का चेहरा बनाए और किसे नही। सूत्रो की माने तो अब ऐसी स्तिथी में पार्टी सबको एक मंच पर लाकर किसी अन्य शीर्ष पंजाबी नेता के नाम पर सभी दावेदारों को मनाने का प्रयास भी कर सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की अगर बात की जाए तो यहां भी 4 नाम चर्चा में है।

पहला नाम पूर्व खेल मंत्री सुखबीर कटारिया, यू तो कटारिया को मजबूत नेता माना जाता है। लेकिन लंबे अरसे से पूर्व मंत्री चुनावो को लेकर सक्रिय नजर नही आये। जैसे ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हाईकमान ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। तो हुड्डा से नजदीकियां होने के कारण पूर्व मंत्री जी की आस जगी और वे सक्रिय नजर आने लगे। दूसरा नाम सीमा पाहूजा, लगातार दूसरी बार पार्षद का चुनाव जीतने के बाद पाहूजा की लोकप्रियता स्पष्ट देखी जा सकती है। गुरुग्राम में कांग्रेस पार्टी ने ज्यादातर पंजाबी उम्मीदवार पर ही दांव खेला है। इसी के साथ महिला दावेदार होने के नाते इनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है। अब बात करे गजे सिंह कबलाना की, तो इन्होंने में कुछ समय पहले ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। लेकिन इनका 900 मीटर के वोट बैंक पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। इनकी धर्मपत्नी सीनियर डिप्टी मेयर भी है। इसीलिए इनकी दावेदारी को भी किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब बात करे एक ओर पंजाबी कांग्रेसी नेता पंकज डाबर की, इन्होंने ने भी पार्टी में आवेदन के अपनी दावेदारी पेश की है। ये एक व्यवसायी घराने से है। इसके साथ साथ ये हर परिस्थिति में कांग्रेस से जुड़े रहे। ऐसे में अगर पार्टी किसी पुराने कांग्रेसी की तलाश में है तो इनके नाम पर भी दांव खेला जा सकता है।

लेकिन बहुत ही जल्द आठ नामों में से कोई दो नाम पार्टी का चेहरा बनेंगे। इसके इलावा कितने चेहरे चुनावी दंगल में ताल ठोकेंगे ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि किसकी मनेगी दीवाली ओर किसका निकलेगा दिवाला।

Loading...