साइबर सिटी में लोगों ने मनाई ‘कोरोना की दीवाली’

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Corona's Diwali

 

गुरुग्राम, 5 अप्रैल 2020 – 5 अप्रैल 2020 रात 9 बजे एक ऐसा इतिहास लिखा गया। जिस पर शायद कोई भी ‘इन्सान’ को खुद पर ग्लानि हो जाये। देश के प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि पूरा देश मोमबत्ती, दिया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर अपनी एकता का परिचय दें व अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रयास करें। सभी जानते हैं कि इस वक्त पूरा विश्व बहुत ही विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है।

वहीं भारत मे भी कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा शतक तक पहुंच चुका है। ऐसे गमगीन माहौल में जहां तो देश के मुखिया ने पूरे राष्ट्र को इस जंग से लड़ने के लिए अपनी एकता का एहसास दिलवाने का प्रयास किया। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हमारे देश मे हैं। जिन्हें शायद ये नही मालूम कि अपने घर मे मौत होने पर मातम मनाया जाता है, न कि जश्न। परन्तु मोमबत्तियों की रोशनी में पूरा आकाश आतिशबाजी से भी नहा रहा था।

बम, पटाखों की गूंज से शांत वातावरण में जश्न का माहौल बन गया। लेकिन सोचने वाली बात है कि जब देश मे 3500 के करीब कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा पहुंच गया हो और 100 के करीब लोग काल के ग्रास में पहुंच गए हो। ऐसी दुख की घड़ी में जश्न किस बात का। न जाने अभी मेरे भारत से कितने लोगों को कोरोना का शिकार होना है। तो जिन लोगों ने आतिशबाजी, पटाखों से राष्ट्र में होने वाली मौतों पर श्रद्धांजलि देने की बजाय जश्न मनाया। क्या उन पर देशद्रोह के तहत कार्यवाही नही होनी चाहिए ? जिन लोगों ने कोरोना जैसी आपदा में प्रधानमंत्री के आह्वान का मज़ाक बनाया, क्या उन पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होनी चाहिये ? अभी सफर बहुत लंबा है, कोरोना से जीते नहीं हैं हम। अगर देश को बचाना है तो ऐसी बचकाना लापरवाहियों से बचना होगा।