गाँवों की सुंदरता के लिए “मिशन लिव माई विलेज” का हुआ शुभारम्भ

157

 

गुरुग्राम, 9 मार्च 2019 – लिव माई विलेज ट्रस्ट ने पहली बार हरियाणा के गुरुगाम से अपने देश व्यापी मिशन की शुरूआत की। पहले चरण में 100 गांव का लक्ष्य रखते हुए प्रत्येक राज्य से 20 गांवों को चुना जा रहा है, जिसमें हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड शामिल हैं। मिशन के संस्थापक महावीर राधा जांगड़ा अपना फिल्म प्रोडक्शन हाउस, थ्री मस्कीटियर्स मीडिया प्रा.लि. चलाते हैं, उन्होने अपने सहयोगी दीपक सिंह सोम के साथ मिलकर इस कार्यक्रम की शुरूआत आज की। कार्यक्रम की मुख्यअतिथि रही मिस इंडिया एवं मिस वल्र्ड एशिया-2014 कोयल राणा ने कहा कि वे इस मिशन से बहुत प्रभावित हैं और स्वयं ज्यादा से ज्यादा गांव में जाकर योग को भी इस मिशन से जोडऩे में जुटी हैं। कोयल राणा ने कहा कि वे चाहती हैं कि खुद गांवों में पहुंचकर लिव माई विलेज से जुड़ रहे लोगों से मिलें और उन्हे लिव माई विलेज का पूरा उदेश्य समझा सकें। उन्होने कहा कि लिव माई विलेज एक ऐसा प्लेटफार्म है जो आज युवाओं को सही राह दिखाना चाहता है। आज के युवाओं का जो सपना है, उस सपने को साकार करने के लिए लिव माई विलेज से अच्छा प्लेटफार्म कोई और नहीं हो सकता। आज देश भर में ग्रामीण प्रवेश में रहने वाले के हालात क्या हैं किसी से छुपा नहीं है। बड़े शहरों की अपेक्षा बहुत से ऐसे गांव हैं जो बहुत पिछड़े हैं, जहां सामाजिक विकास के नजरिए से यह मिशन एक महत्वपूर्ण कदम है। मिशन की शुरुआत हरियाणा के गांव दाबोदा, मेहदीपुर से की गई, जहां पूर्व डीजीपी रंजीव दलाल ने सरपंच और गांव पासियों के साथ मिलकर गांव को सवारने में वर्षों से कड़ी मेहनत की और लिव माई विलेज की टीम के साथ मिलकर गांव में बड़े व नये बदलाव किये। गांव के सरपंच प्रतिनिधि राजेश भारद्वाज ने मिशन का प्रत्येक भाग बहुत खूबसूरती के साथ कार्यान्वित किया। इस मिशन का उदेश्य गांव में युवाओं के साथ मिलकर सरपंच सेना का गठन, जिसमें पानी बचाने के लिए जल नायक, हरियाली बढ़ाने प्रदूषण से लडऩे के लिए वन नायक और गलियोंं की साफ सफाई व विकास कार्यों के लिए पथ नायक चुने जा रहे हैं। मिशन के तहत गांव के स्कूलों में सबके मन की बात कार्यक्रम की शुरूआत की जिसमें सरपंच व युवा विद्यार्थी अपनी समस्याओं को साझा करने के साथ उसके समाधान भी निकालते हैं। मिशन के संस्थापक महावीर राधा जांगड़ा ने बताया कि वे पिछले तीन सालों से गांव-गांव जाकर इस मिशन की तैयारी में जुटे हैं। उन्होने बड़ी बारीकी से गांव की समस्याओं को समझा व उसका सही समाधान निकालने के लिए आज इस मिशन की शुरुआत की। वे खुद एक फिल्ममेकर होते हुए यह सोचते रहे कि वे सामाज के लिए ऐसा क्या कर सकते हैं जो वो अपने क्षेत्र में कार्य करते हुए सामाज की मिशाल बन सकें।