काव्यगोष्ठी में बही निराली रसधार ये तो नशा है तेरे प्यार का, न शराब है न शवाब है

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आगरा, 23 सितम्बर 2019 (नवनीश रौतेला)। साहित्यिक पत्रिका संस्थान संगम की मासिक गोष्ठी में खूब काव्य रस धार बही। नगर के गण्यमान कवियों ने जहाँ कश्मीर से धारा 370 हटाने और एक राष्ट्र एक निशान को अपनी रचनाओं में रेखांकित किया तो हिंदी माह के परिप्रेक्ष्य में राजभाषा हिंदी को अपनी पँक्तियों के माध्यम से नमन किया।

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजेन्द्र मिलन ने की व संचालन किया कवि अशोक अश्रु ने। गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार रानी सरोज गौरिहार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।

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गोष्ठी का प्रारम्भ श्री सुशील सरित की सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने “हिंद देश की पहचान है हिंदी” कविता पर तालियां बटोरी तो डॉ यशोयश ने “हिंदी तुमको नमन’ और मंजू यादव ग्रामीण ने “मातृभूमि का उपहार है हिंदी” पँक्तियों से राजभाषा का सम्मान किया। सर्वज्ञ शेखर और चारु मित्रा ने “कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगा” और “एक राष्ट्र एक निशान” कविताओं से कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया। योगी सूर्यनाथ ने वीर रस की कविता “सत्य का बलिदान होना तय हुआ है” सुना कर श्रोताओं में जोश भर दिया ।

श्रीमती रमा वर्मा के गीत ये तो नशा है तेरे प्यार का, न शराब है न शवाब है और मथुरा के नरेंद्र कुमार शर्मा के बृज भाषा के हंसगुल्लों ने खूब गुदगुदाया। गीतकार परमानन्द शर्मा और वैभव असद अकबराबादी की गज़लों व श्रीमती माया अशोक की कविता “फूल फूल मकरंद” भी सराही गईं। ममता तिवारी, प्रेमसिंह राजावत प्रेम, कीर्ति, मुकेश मित्तल, प्रार्थना मिश्रा, प्रेमसिंह त्यागी, डॉ रमेश आनन्द, विजया तिवारी, भगवान सहाय श्रीवास्तव, हरीमोहन काठिया, मुकेश अग्रवाल, कमला सैनी, डॉ भावना, भावना मेहरा, चारु मित्रा, वीरेंद्र सिंह, के नन्दा, अंकुर बंसल ने भी काव्यपाठ किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र मिलन ने अपनी रचना “तुम्हारा मन पढ़ें” सुना कर मंत्रमुग्ध कर दिया।