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श्री गुरु नानक देव जी की अयोध्या यात्रा बनी राम मंदिर मामले में साक्ष्य

guru nanak dev

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उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को अयोध्या मामले में हर पक्ष की दलीलों को केंद्रित करते हुए फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में मिले साक्ष्यों से साबित होता है कि मस्जिद के नीचे कोई ढांचा था, जो इस्लामिक नहीं था।

एएसआई की अंतिम रिपोर्ट बताती है कि खुदाई के क्षेत्र से मिले साक्ष्य दर्शाते हैं कि वहां अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग सभ्यताएं रही हैं जो ईसा पूर्व दो सदी पहले उत्तरी काले चमकीले मृदभांड तक जाती हैं। खुदाई ने पहले से मौजूद 12वीं सदी की संरचना की मौजूदगी की पुष्टि की है। संरचना विशाल है और उसके 17 लाइनों में बने 85 खंभों से इसकी पुष्टि भी होती है। पुरातात्विक साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि नीचे बनी हुई वह संरचना जिसने मस्जिद के लिए नींव मुहैया करायी, स्पष्ट है कि वह हिन्दू धार्मिक मूल का ढांचा था।

सुप्रीम कोर्ट ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की अयोध्या यात्रा का भी जिक्र किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि गुरु नानक देव ने राम जन्मभूमि का दर्शन करने के लिए सन 1510-11 में अयोध्या की यात्रा की थी। उनकी यात्रा से हिंदुओं की इस आस्था और विश्वास को बल मिलता है कि विवादित भूमि ही भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जन्म साखी में यह उल्लेख है कि गुरु नानक देव जी अयोध्या गए थे और राम जन्मभूमि का दर्शन किया था। जन्म साखी को शीर्ष अदालत में रिकॉर्ड पर रखा गया है।

जज ने कहा है कि इसको लेकर ठोस तथ्य तो नहीं है कि भगवान राम का जन्म किस स्थान पर हुआ था। लेकिन गुरु नानक देव का राम जन्मभूमि का दर्शन करने आयोध्या जाने की घटना से साफ है कि सन 1528 से पहले वहां राम जन्मभूमि का अस्तित्व था और श्रद्धालु वहां दर्शन करने जाते थे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में बताया गया था कि मुगल सम्राट बाबर ने 1528 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। जज ने यह भी कहा कि वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण में भी अयोध्या का उल्लेख भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में किया गया है। हिंदुओं की आस्था और विश्वास के समर्थन में इन धार्मिक ग्रंथों के तथ्यों को भी आधारहीन नहीं ठहराया जा सकता।

सिख धर्म के जानकार, चिंतक और लेखक डॉ. सत्येंद्र पाल सिंह भी कहते हैं कि अयोध्या की पहचान ही श्रीराम से है। गुरु नानक देव जी जब अपनी धर्म यात्राओं के क्रम में नानकमत्ता, गोला होते हुए जल मार्ग से अयोध्या पहुंचे थे, उस समय उन्होंने अपने साथ चल रहे भाई मरदाना जी का अयोध्या से परिचय श्रीराम चंद्र जी की नगरी के रूप में कराया था।