एम्मार ग्रुप से परेशान लोग बोले, “ऊँची दूकान, फीका पकवान

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गुरुग्राम, 29 जून 2020 (मनप्रीत कौर) यूँ तो साइबर सिटी की शोहरत में यहां की गगनचुम्भी चमचमाती इमारतें चार चांद लगाती है। हर किसी का सपना होता है कि अपनी एक छत हो, सपनों का घर हो। और ऐसे ही सपने बिल्डर्स द्वारा दिखाए भी जाते हैं। लेकिन जब एक बड़े ब्रांड के नाम पर लोग अंधा विश्वास कर अपनी जिंदगी की कमाई लगा देते है। तो उनके साथ क्या बीतती है। आइये सुनते हैं ऐसी ही एक दास्तां गुरुग्राम के द्वारका एक्सप्रेस वे पर बने एम्मार ग्रुप के गुडगाँव ग्रीन्स के निवासियों की।
देश की सीमाओं पर देशवासियों की रक्षा कर राष्ट्र के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर, वर्षों सेना में नोकरी करने के बाद जब राजबीर सिंह ने अपने बुढ़ापे में चैन की सांस लेनी चाही तो इस बिल्डर के चुंगल में फंस कर वो सपना भी टूट गया। यहां रह रहे लोगों ने वायरल सच से बात करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 1 करोड़ में यहां फ्लैट लिए थे। अभी एक वर्ष भी पूरा नही हुआ। 2 साल के मेंटेनेन्स चार्जेस भी पहले ही ले लिए गए। लेकिन आलम ये है कि थोड़ी हवा चलने पर ही ऊंची इमारतों की खिड़कियों के शीशे नीचे गिर जाते हैं। अगर दुर्भाग्यवश इस हादसे में किसी जान चली जाए तो उसकी भरपाई भी नही हो पाएगी। स्विमिंग पूल गिरने के कगार पर है। लगभग सभी फ्लैट्स में दरारें आ चुकी है। भूकम्प को लेकर NCR में पहले ही चेतावनी मिली हुई है। ऐसे में बिल्डर द्वारा प्रयोग की गई घटिया निर्माण सामग्री से बड़े हादसे की आशंका बनी हुई। जिसे लेकर हर ऑथोरिटी तक शिकायत भी की जा चुकी है।
दोस्तों अब यहां रुतबा काम कर रहा है या पैसा ये तो एक जांच का विषय है। लेकिन सवाल ये है कि
आखिर कैसे लोग अपने सपनों का घर बनाएं ?
कैसे पड़ताल करें ?
और हां! अगर बड़े नाम के चक्कर में ठगे भी गए तो शिकायत किसे करें ?
ऐसे में तो इन लोगों का सिर्फ नीली छत्तरी वाला ही रखवाला नजर आता है। लेकिन यहां के निवासियों की अपील है कि बात चाहे RWA की हो, बिजली की हो, पार्किंग की हो, मूलभूत सुविधाओं की हो, सुरक्षा की या दरवाजे खिड़कियां टूट कर गिरने की हो। ये सभी यहां के संवेदनशील मुद्दे है। शासन प्रशासन किसी अनहोनी से पहले दखल देकर बिल्डर से यहां के निवासियों की की दिक्कतों को हल करवाये।