हर हाल में प्रभु पर भरोसा रखें बाबा हरदेव सिंह जी को भावभीनी श्रद्धांजलि

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Baba Hardev Singh

 

दिल्ली, 15 मई 2019: हर हाल में प्रभु पर भरोसा रखें। जीवन सुखमय हो या दुःखमय हो हमें इसे ईश्वर की रजा मानकर स्वीकार करना चाहिए। मन में किसी प्रकार की शंका को उत्पन्न न होने दें। निरंकार का सहारा सर्वोच्च है और हर समय सर्वोच्च मानकर दुनियां की हर वस्तु को उसके बाद ही महत्ता दें।

ये उद्गार निरंकारी सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने बाबा हरदेव सिंह जी की याद में आयोजित समर्पण दिवस पर कल यहाँ व्यक्त किए। बाबा हरदेव सिंह जी तीन वर्ष पूर्व 13 मई, 2016 को साकार से निराकार में विलीन हुए थे। इस समागम में दिल्ली तथा आस-पास के क्षेत्रों के अलावा देश के अन्य भागों से भी आये हुए हजारों श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया और अपने आपको इस मिशन को उन ऊँचाईयों तक ले जाने के लिए पुनः समर्पित किया जहाँ बाबा हरदेव सिंह जी इसे देखना चाहते थे।

 

Baba Hardev Singh ji

सद्गुरु माता जी ने फरमाया कि बाबा जी भी यही चाहते थे कि हम निरंकार पर इतना दृढ़ विश्वास रखें कि स्थिति हमें अच्छी मिल रही हो या बुरी, हम केवल निरंकार का शुकराना ही करें और यह भी न सोचें कि ऐसा क्यों हुआ बल्कि मन में यही भाव हो कि परमात्मा जो कुछ कर रहा है वह हमारे लिए अच्छा ही होगा। अतः हम पल-पल इस निरंकार प्रभु परमात्मा के शुक्रगुजार ही बने रहें।

सद्गुरु माता सुदीक्षा जी ने कहा कि हम संतों का संग करें और निरंकार को अन्तिम नहीं बल्कि पहला सहारा ही बनायें। जैसे बाबा जी ने चाहा हम हर समय इसका सुमिरण करें और इसे अपने मन से दूर न होने दें। इससे हमारे मनों के भाव निर्मल होंगे और हम सभी के साथ नम्रता पूर्वक व्यवहार करेंगे हमारे शब्दों में मिठास होगी। हम किसी भी विपरीत भाव को मन में नहीं आने देंगे। बाबा जी चाहते थे कि हम अपने नेक व्यवहार के कारण ही प्रशंसा के पात्र बन सकते हैं। मानवता, भाईचारे, एकत्व तथा सद्भाव जैसे गुण हमारे कर्म से झलकने चाहिए। हम किसी से भी कड़वा न बोलें ।

 

Baba Hardev Singh ji

सद्गुरु माता जी ने आगे फरमाया कि जीवन में सुख-दुख तो लगा ही रहता है पर हम एक सहज भाव रखें अपने आपको डोलने न दें। उन्होंने कहा कि बाबा जी को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण करने से होगी। बाबा जी हर एक भक्त को अपने परिवार से भी बढ़कर प्यार करते थे। उनकी नम्रता का तो कोई मुकाबला ही नहीं था। यहां तक कि वह हमेशा यही कहते थे कि मैं मिशन अथवा मानवता के लिए यदि कोई योगदान दे पाया हूं तो उसका श्रेय निरंकार को जाता है, साध संगत को जाता है।

समागम के दौरान संत निरंकारी मण्डल के अध्यक्ष श्री गोबिन्द सिंह जी, केंद्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन श्री खेमराज चड्डा जी तथा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष परम् पूज्य बहन बिन्दिया छाबड़ा जी ने बाबा जी के साथ बिताये हुए समय को याद किया और कहा कि उनके मार्गदर्शन में मिशन के हर पहलू में विस्तार आया और उन्होंने प्रेम, नम्रता तथा सद्भाव की छाप हर उस व्यक्ति के मन पर छोड़ी जिसने कहीं भी उनके दर्शन किये और उनसे बात करने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी प्रार्थना की, कि हम सद्गुरु माता सुदीक्षा जी के मार्गदर्शन में बाबा जी के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए तन, मन, धन से योगदान दे सकें।

 

Baba Hardev Singh ji

इस अवसर पर निरंकारी स्टूडियो की ओर से एक डाक्यूमेंट्री दिखाई गई जिसमें बाबा जी के प्रवचनों के अंश शामिल थे जिसके द्वारा बाबा जी ने सत्संग के महत्व को विस्तारपूर्वक समझाया। इसके अलावा बाबा जी के जीवन के विशेष पहलुओं को लेकर बहुत ही प्रभावशाली झलकियां दिखाई गई। बाबा जी के जीवन तथा शिक्षाओं पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगायी गई जिसमें बाबा जी के बचपन से लेकर जीवन भर मानवता की सेवा के लिए किये हुए महान योगदान को विस्तारपूर्वक दिखाया गया था।