गुरुग्राम में 92 वर्षीय द्रोपदी की देह मेडिकल रिसर्च के लिए दान

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गुरुग्राम, 18 नवंबर 2019। डेरा सच्चा सौदा के गद्दीनशीन संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा की पावन प्रेरणा से गुरुग्राम की बुजुर्ग माता द्रोपदी इंसा की मृत देह दान की गई। परिवार में से सदस्य के जाने का तो दुख है, पर परिवार ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व श्रीमती द्रोपदी इंसा के बेटे ताराचंद की देह को भी मेडिकल रिसर्च को दान किया गया था।

 

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वर्षों से गुरुग्राम में रह रहा यह परिवार मूलरूप से राजस्थान के गुरुसर मोडिय़ा के निकट गोलूवाला का रहने वाला है। रुढि़वादी समाज की सोच से ऊपर उठकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम के अशोक विहार फेज-3 में रहने वाले एक परिवार ने बुजुर्ग माता जी की मृत देह को मेडिकल रिसर्च के लिए ईएसआईसी मेडिकल कालेज फरीदाबाद को सौंपा।

 

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रविवार 17 नवम्बर 2019 को बुजुर्ग द्रोपदी का देहांत हो गया था। अपनी उम्र के हिसाब से जीवन यात्रा को पूर्ण करके गई श्रीमती द्रोपदी का शरीर बेशक मृत हुआ हो, लेकिन परिवार में वे सदा जिवित रहेंगी। श्रीमती द्रोपदी इंसा के परिवार में चार बेटियों के अलावा पुत्र बच्चन सिंह सिंह इंसा एवं पुत्रवधू गुलशन देवी इंसा, पुत्रवधु राजस्थान में 45 मेंबर मालती इंसा पत्नी ताराचंद इंसा तथा पौत्र मोहित व सुखजीत हैं। चार बेटियों आशा, नीलम, अल्का और शोभा ने अपनी मां श्रीमती द्रोपदी की अर्थी को कंधा दिया और फिर उनकी मृत देह को मेडिकल रिसर्च के लिए सौंप दिया। इस दौरान गुरुग्राम की साध संगत काफी संख्या में मौजूद रही। शाह सतनाम सिंह जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार अपनी वर्दी में पहुंचे और स्वर्गीय श्रीमती द्रोपदी देवी के पार्थिव शरीर को नमन करते हुये नमन किया।

 

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द्रोपदी के बेटे की भी देह की थी दान

जिस समाज में लोग किसी भी तरह का दान देने से कतराते हैं, उसी समाज में श्रीमती द्रोपदी के परिवार ने ऐसी गाथा लिखी है जो सदा याद रखी जायेगी। जब श्रीमती द्रोपदी जिवित थी तो उनके सामने ही उनके करीब 55 वर्षीय बेटे ताराचंद का देहांत हो गया था। चूंकि परिवार ने देह दान के लिए डेरा सच्चा सौदा में फार्म भरकर अपनी स्वीकृति दे रखी है। इसी के चलते श्री ताराचंद की मृत देह भी मेडिकल रिसर्च के लिए दान दी गई। यह कार्य बहुत बड़े दिल वाला ही कर सकता है।

बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा

रुढि़वादी समाज की सोच से ऊपर उठकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में जब बेटियों ने मां की अर्थी का कंधा दिया तो हर कोई देखता रहा। समाज में इस तरह के बदलाव को दिखाकर कोई वाहवाही नहीं लूटनी, लेकिन बदलाव जरूरी है। यहां बेटियों ने दिखा दिया कि बेटियों को बराबरी का दर्जा देने की बात करने वाले हमारे समाज में बेटियां खुद आगे बढ़कर अपने को स्थापित कर रही हैं। अपनी 92 वर्षीय मां द्रोपदी की अर्थी को कंधा देकर उनकी चार बेटियों आशा, नीलम, अल्का और शोभा ने पूज्य गुरु जी के वचनों पर पुष्प चढ़ाये।

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